Monday, May 28, 2018
Text Size

Upcoming Events

Past events

 

हर साल खेती से 60 करोड़ कमाता है ये किसान , खेती से बदल रहा आदिवासी परिवारों की ज़िंदगी

हर साल खेती से 60 करोड़ कमाता है ये किसान , खेती से बदल रहा आदिवासी परिवारों की ज़िंदगीaltaltalt

 

 

मीठीमीठी सी खुशखबरी

 Image may contain: 1 person, text

आज सुबह : देश की पहली खबर , मीठीमीठी सी खुशखबरी........
हम जैसे किसानों के लिए और डायबिटीज तथा मोटापे से ग्रस्त लोगों के लिए। 
This morning: Country's first SWEET News... Good news for the farmers like us and for people with DIABETES and OBESITY.

 

“VIBRANT NORTH EAST 2018”

महामहिम श्री जगदीश मुखी जी राज्यपाल असम ( Hon’ble Shri Jagdish Mukhi, Governor, Assam ) से पिछले हफ्ते “VIBRANT NORTH EAST 2018” के समापन समारोह के मंच पर भेंट हुई, अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि जैविक खेती, मसालों तथा हर्बल की खेती की सबसे प्रबल संभावनाएं पूर्वोत्तर के राज्यों में हैं। इससे सहमत होते हुई मैंने इसमें यह भी जोड़ा कि छत्तीसगढ , झारखण्ड, उड़ीसा जैसे राज्य भी जैविक खेती तथा उच्च लाभदायक वनस्पतियों , हर्बल , तथा मसालों की खेती में देश की अग्रणी राज्यों के रूप में उभर सकते हैं , किन्तु इसके लिए ज़रूरी है एक सुविचारित दीर्घकालीन कृषि - नीति की तथा उस पर अमल करने के लिए दृढ़ संकल्प शक्ति की , जिसका कि इन राज्यों में नितांत अभाव दिखता है ।इस कार्यक्रम में हमारे साथ है सेंटर फॉर एग्रीकल्चर एंड रूरल डेवलपमेंट कार्ड के कार्यकारी निदेशक प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर ए के श्रीवास्तव , प्रसिद्ध उद्योगपति तथा समाजसेवी श्री सौरभ अग्रवाल तथा अंतरराष्ट्रीय कृषि सलाहकार समूह के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री दिनेश सिंह चौहान ने मंच साझा किया तथा अपने विचार भी रखे , इस कार्यक्रम में पूर्वोत्तर राज्यों के विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा प्रगतिशील किसान भारी संख्या में उपस्थित थे जिनमें महिलाओं की संख्या पुरुषों से ज़्यादा थीImage may contain: one or more people and people sittingImage may contain: 1 person, standing

 

 Inspection of Herbal Garden of IGNTU “Indira Gandhi National Tribal University" 

Image may contain: one or more people, people standing, plant, outdoor and natureImage may contain: 3 people, people smiling, people standing

19 मई , बीते कल : “इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय “ के द्वारा अमरकंटक की वादियों में विकसित किये गये अनूठे हर्बल गार्डन का निरीक्षण करने का सुअवसर प्राप्त हुआ। इस अनूठे विश्वविद्यालय की व्यवस्था यहाँ के शिक्षकों का इस विश्वविद्यालय के प्रति समर्पण यहाँ का अनुशासन , इस परिसर की आश्चर्य चकित कर देने वाली स्वच्छता आदि को देखकर मैं पहले ही कायल हो चुका था । दरअसल पिछली मुलाक़ात में ही इस विश्वविद्यालय के कुलपति तथा अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त विद्वान प्रोफेसर कट्टीमनी ने मुझे इस हर्बल गार्डन का निरीक्षण करने तथा अपनी राय देने हेतु कहा था।
विगत 20 वर्षों में बहुत सारे हर्बल गार्डन सरकारी तथा ग़ैर सरकारी देखे , भारत के कृषि मंत्रालय ने पिछले वर्षों में लगभग सात सौ (700 ) से भी अधिक हर्बल गार्डन के लिए अनुदान प्रदान किया था ,तथा उसके निरीक्षण का ज़िम्मा हमारी संस्था ‘सेंट्रल हर्बल एग्रो मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ़ इंडिया’
www.chamf.org जिसे हम संक्षेप में चैंम्फ कहते हैं , को दिया गया था। जिसके तारतम्य में सरकारी पैसे से तैयार किए गए हर्बल गार्डन देखने जब देश के अलग अलग जगहों पर गये, तो कई विचित्र विचित्र अनुभव मिले, देश के एक प्रख्यात विश्वविद्यालय में हर्बल गार्डन हेतु सरकार से पूरा पैसा लेने के उपरांत भी हर्बल गार्डन के लिए तय ज़मीन पर निरीक्षण करने हेतु पहुंचने पर वहाँ गोभी लगी हुई पाया,, और वहां के प्रभारी डॉक्टर साहब सिर ख़ुजलाते इधर उधर उगे कुछेक खर-पतवारों में हर्बल पौधे ढूंढने की नाकाम कोशिश करते रहे । बहरहाल ये कहानी फिर कभी....। तो हम फिर पहुँचते हैं अमरकंटक के राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय के हर्बल गार्डन में , जिसे देखकर सचमुच मन प्रसन्न हो गया ।कई प्रकार की जड़ी बूटियाँ जो केवल अपने प्राकृतिक निवास , जंगल में ही प्रसन्न मुद्रा में मिलती है इस हर्बल गार्डन में बेहद ख़ुशनुमा हालात में मिलीं ।कई दुर्लभ बूटियों को यहाँ पर बड़े व्यवस्थित ढंग से एकत्र किया गया है ।इन जड़ी बूटियों को दिखाने के कार्य में मेरे गाइड थे प्रोफ़ेसर राकेश सोनी जी, जिन्होंने बड़ी तफ़सील से मुझे एक ही पौधे के बारे में बताया उन्होंने बताया कि कैसे प्रोफ़ेसर कट्टीमनी ने इस अनूठे हर्बल गार्डन को तैयार करने का स्वप्न देखा तथा साकार भी किया। हमारे साथ हमारी टीम के सभी साथी यह देखकर बेहद प्रसन्न हुए कि मई महीने की प्रखर दुपहरी में भी सभी पौधे बेहद ही स्वस्थ व प्रफुल्लित हैं । गुड़मार ,सफ़ेद मुसली तथा मीठी तुलसी (स्टीविया ) एवं पुनर्नवा के पौधों की बढ़वार को देखकर मुझे आश्चर्य हुआ ।यहाँ की जलवायु तथा ये मिट्टी बेहद ही उपयुक्त है चारों ओर पहाड़ियों से घिरे इस मनोहर सुरम्य स्थल पर जड़ी बूटियों नैसर्गिक रूप से पुष्पित पल्लवित हो रही हैं । इसका पूरा श्रेय इसके स्वप्नदृष्टा प्रोफ़ेसर कट्टीमनी जी तथा उनकी समर्पित टीम को जाता है। मैंने वहाँ पर यहीं के केवीके के युवा वैज्ञानिकों को तेज धूप में इन जड़ी बूटियों के साथ काम करते हुए देखा ,जिससे मुझे बड़ी हैरतभरी प्रसन्नता हुई और मैं आश्वस्त भी हुआ, कि यह काम बहुत आगे तक बढ़ेगा एवं निश्चित रूप से मानव समाज को इसका दूरगामी तथा अधिकतम लाभ प्राप्त होगा । प्रोफ़ेसर कट्टीमनी साहेब एक नई पीढ़ी को गढने में लगे हैं ,पूरी तन्मयता से ,पूरी लगन से....,,,
कट्टीमनी साहेब मैं सलाम करता हूं आपकी सोच को , आप की सादगी व विनम्रता को, जो आजकल दुर्लभ हो चली है, , आप के जज्बे को तथा आपकी कर्मठता एवं जीवटता को..... ।
ढेर सारी शुभकामनाएं ..आप को ,
आपकी पूरी टीम को ,
आपके सभी छात्रों को ,
आपके केवीके की टीम को,
आपके हर्बल गार्डन के हर पत्ते-पत्ते को , बूटे-बूटे को... 
alt

Our Certified Organic Products Details

Buy Our Certified Organic Products Directly from Company Office Raipur C.G. Call us on +91-771-2263433. 

Power on -

alt

Liver On -

alt  

Musli Amrit -

alt

Memory On -

alt

Herbal Tea -

alt

Musli Amrit Gold -

alt

 

Trikatu -

alt

Trriphala -

alt

 

alt